अशोक सम्राट कि नगरी पाटलिपुत्र, गौतम बुद्ध एवं महाबीर कि ज्ञान स्थली, गुरु गोविन्द सिंह कि जन्म-स्थली, राजनिती के सबसे बड़े ज्ञाता चाणक्य कि धरती, महात्मा गाँधी एवं लोकनायक जयप्रकाश नारायण कि कर्म भूमि पर जो माननीय विधायकों ने विधान सभा एवं विधान परिषद् में अमानवीय रूप दिखाया वह अशोभनीय है। इसकी जीतनी भी निंदा कि जाय वो भी कम है इन विधायकों का रौद्र रूप देख कर यह नहीं लग रहा था कोई मानव लड़ रहा है लगता था कोई अशुर लड़ रहा है। ये हमारे बिहार के माननीय विधायक गण है जो हम आप जैसे लोंगो का मत लेकर विधान सभा में पहुंचे है। आप इनसे क्या उम्मीद करेंगे ? क्या ऐसे लोग बिहार को आगे ले जायेंगे ? बिहार कि गरिमा जो पहले से धूमिल है क्या और धूमिल नहीं हुई ? विधान सभा या विधान परिषद् इनके घर का आंगन नहीं है जो गाली-गलौज, मार-पिट और कुर्शी फेकौअल तक करते है। क्या इनको रत्ती भर शर्म आती है अपने किये पर ? अगर शर्म आती तो दुसरे दिन विधान परिषद् में यह घटना नहीं घटती। इस लड़ाई में पझ और विपझ दोनों ने अपना-अपना रूप दिखाया है। गलती किसी कि भी हो कलंक तो बिहार के माथे पर ही लगा। बिहार के सपूतों ने बिहार के माथे पर कलंक का एक और किल ठोंक दिया। इन में से ज्यादातर सदस्य गण जे पी आन्दोलन के सदस्य रहे है, अगर जय प्रकाश नारायण कि आत्मा ऊपर से इन लोंगो के व्यवहार को देखती होगी तो क्या महशुस करती होगी, उन्हों ने तो इनको एक अच्छे राजनितिग्य बनाये, सत्ता में जाने के रास्ते बताये उन्हें क्या मालूम था कि ये सत्ता में जाने के बाद इंसानियत ही खो देंगे। अगर हमारे इन माननीय विधायकों में जरा भी इंसानियत बची हुई है या जनता के प्रति जरा भी लगाव है तो ये सारे विधायक बिहार कि जनता तथा देश कि जनता से मांफी मांगे और कसम खाएं फिर यह घटना दुबारा नहीं होगी।अगर यह घटना निकट भविष्य में होने वाले चुनाव को ध्यान में रख कर किया गया है या आम जनता के ध्यान को अपनी ओर आकृष्ट करने के लिए किया गया है तो मै यही कहूँगा कि अब बिहार के लोग इतने बेवकूफ और गंवार नहीं है जो हो रही इन घटनावों को नहीं समझ रहें है। यह बिहार, बिहार कि जनता कि है कुछ मुठ्ठी भर राज नेतावों कि नहीं है। इसलिए ये राज नेता अपनी मनमानी बंद करें नहीं तो बिहार कि जनता आने वाले चुनाव में सबक सिखा सकती है।Friday, July 23, 2010
कलंक का किल ठुका बिहार के माथे पर
अशोक सम्राट कि नगरी पाटलिपुत्र, गौतम बुद्ध एवं महाबीर कि ज्ञान स्थली, गुरु गोविन्द सिंह कि जन्म-स्थली, राजनिती के सबसे बड़े ज्ञाता चाणक्य कि धरती, महात्मा गाँधी एवं लोकनायक जयप्रकाश नारायण कि कर्म भूमि पर जो माननीय विधायकों ने विधान सभा एवं विधान परिषद् में अमानवीय रूप दिखाया वह अशोभनीय है। इसकी जीतनी भी निंदा कि जाय वो भी कम है इन विधायकों का रौद्र रूप देख कर यह नहीं लग रहा था कोई मानव लड़ रहा है लगता था कोई अशुर लड़ रहा है। ये हमारे बिहार के माननीय विधायक गण है जो हम आप जैसे लोंगो का मत लेकर विधान सभा में पहुंचे है। आप इनसे क्या उम्मीद करेंगे ? क्या ऐसे लोग बिहार को आगे ले जायेंगे ? बिहार कि गरिमा जो पहले से धूमिल है क्या और धूमिल नहीं हुई ? विधान सभा या विधान परिषद् इनके घर का आंगन नहीं है जो गाली-गलौज, मार-पिट और कुर्शी फेकौअल तक करते है। क्या इनको रत्ती भर शर्म आती है अपने किये पर ? अगर शर्म आती तो दुसरे दिन विधान परिषद् में यह घटना नहीं घटती। इस लड़ाई में पझ और विपझ दोनों ने अपना-अपना रूप दिखाया है। गलती किसी कि भी हो कलंक तो बिहार के माथे पर ही लगा। बिहार के सपूतों ने बिहार के माथे पर कलंक का एक और किल ठोंक दिया। इन में से ज्यादातर सदस्य गण जे पी आन्दोलन के सदस्य रहे है, अगर जय प्रकाश नारायण कि आत्मा ऊपर से इन लोंगो के व्यवहार को देखती होगी तो क्या महशुस करती होगी, उन्हों ने तो इनको एक अच्छे राजनितिग्य बनाये, सत्ता में जाने के रास्ते बताये उन्हें क्या मालूम था कि ये सत्ता में जाने के बाद इंसानियत ही खो देंगे। अगर हमारे इन माननीय विधायकों में जरा भी इंसानियत बची हुई है या जनता के प्रति जरा भी लगाव है तो ये सारे विधायक बिहार कि जनता तथा देश कि जनता से मांफी मांगे और कसम खाएं फिर यह घटना दुबारा नहीं होगी।अगर यह घटना निकट भविष्य में होने वाले चुनाव को ध्यान में रख कर किया गया है या आम जनता के ध्यान को अपनी ओर आकृष्ट करने के लिए किया गया है तो मै यही कहूँगा कि अब बिहार के लोग इतने बेवकूफ और गंवार नहीं है जो हो रही इन घटनावों को नहीं समझ रहें है। यह बिहार, बिहार कि जनता कि है कुछ मुठ्ठी भर राज नेतावों कि नहीं है। इसलिए ये राज नेता अपनी मनमानी बंद करें नहीं तो बिहार कि जनता आने वाले चुनाव में सबक सिखा सकती है।
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